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Kami Khalti Hai | Written By Zubair Ahmad | Narrated By Neelesh Misra #poetry

42.4K views· 1,437 likes· 5:44· Sep 20, 2024

#neeleshmisra #poetry #hindipoetry #audiostory #audiostories #hindistories #stories #storytelling #audio #story रात को बिस्तर में जो, नींद की कमी खली उठ के बैठा, सोचता रहा इधर-उधर चलता भी रहा अँधेरे में रात को ढूँढता रहा, और बिस्तर में नींद कुछ तो कमी है जो खल रही है मुझे कमी शायद वक़्त की। वक़्त जो मेरा बचपन है वक़्त सच्चापन भी, वक़्त मौज भरा, वक़्त सुहाना भी, वक़्त हँसता हुआ, वक़्त रोता हुआ, वक़्त लहलहाता हुआ वक़्त मुस्कुराता भी, वक़्त आज़ाद भी, और वक़्त बेवक़्त भी कमी खलती है मुझे वक़्त की। वक़्त ने बाग़ दिया मुझे ज़िंदगी का और उसमें थे फूल और काँटे भी बहुत सारे बाग़ में तितली भी थी और बाग़ में चिड़िया भी सर-सब्ज़ घास और शबनम के क़तरे वो सर्द सी खुशबूदार हवा का गुज़रना और वो ख़मोश सुकून का आना .... कमी खलती है… वक़्त ने ज़िंदगी के नशीबे-ओ-फ़राज़ को समेटने भेजा और वो जो फिर पीछे छूटा... कमी खलती है। कमी खलती है मुझे वक़्त की जो मेरे दोस्त भी हैं, मेरा गाँव भी है, मेरा घर भी है गाँव की गलियाँ और मैदान भी वक़्त, वो गाँव का दरिया भी और दरिया का किनारा भी वक़्त वो मौसम मौसम जो शराबोर था और वक़्त बर्फ़ से ढँका भी। वक़्त मेरी काँगड़ी भी और फेरन भी। वक़्त मेरा वो दादी की कहानियाँ भी और मेरे दोस्तों के झूठे किस्से भी। वक़्त मेरे अब्बा भी हैं जिन्होंने सर से पैर तक मुझे बनाया ख़ूब तराशा और ख़ूब तराशा और ज़िंदगी के साथ उठाना बैठाना भी बताया ज़िंदगी की मस्ती भी बताई और ज़िंदगी का संजीदापन भी ज़िंदगी के थपेड़े भी दिखाए और चलन की भी अच्छी तस्वीर बनाई अपना खटना भी जताया और अपना थकना भी बताया बात भी करना सिखाया और बात बताना भी बताया अब्बा ने ज़माने का शोर भी सुनाया गर वो हर चीज़ जिसने ज़िंदगी और जीने को बनाया मैं उँगली थामे अब्बा की, सुनता गया, चलता गया पूछता रहा कभी-कभी ये क्यों और कैसे? और वे बताते गए और दिखाते चले गए। अब अब्बा थोड़े थक गए और रुक भी गए पता ही नहीं कब उँगली छुड़ाके मैं, मगन ज़िंदगी के साथ चलता रहा, दौड़ता रहा पता ही नहीं चला अब्बा रुक भी गए थे, थक भी गए थे। अब अब्बा की... कमी खलती है। कमी खलती है माँ की भी, वो भी यहीं-कहीं थी, शायद आज भी मेरा इंतज़ार कर रही है। उसने मेरा खाना जो मुझे बहुत पसंद था, वो भी बनाया होगा दरवाज़े की तरफ़ भी निगाह होगी, पूछती भी होगी शायद ज़िंदगी से मेरा दुलारा तो तुम्हारे साथ था... वापस नहीं आया? मैं भी अब थक गई हूँ, मैं भी अब रुक गई हूँ। थोड़ी देर आता, तो थोड़ा ही सही पर साथ तो चलते मैंने उसकी पसंद का खाना भी बनाया, साथ तो खाते। मैंने छाछ और लस्सी भी बनाई, साथ तो पीते! दो पल हम भी जीते, दो पल हम भी रहते-सहते पर मैं मगन कहीं और था अब इन पलों की... कमी खलती है। सारे बच्चे अड़ोस-पड़ोस के मिलते-जुलते थे, हँसते-खेलते थे, लड़ते भी बहुत थे... एक-दूसरे को नए कपड़े और खिलौने भी दिखाते थे, मोह भी था और मोहब्बत भी थी, सच्चाई और प्यार भी बहुत था। नदी में जब जाते, तो कपड़े भी एक दूसरे के चुराते, लेकिन वापस भी करते थे। एक-दूसरे के राज़दार भी थे वरना पकड़े तो कई बार जाते। खिलौने भी बांटते थे और कोई अच्छा खाना मिला, उसको भी। वो हवा भी कुछ और थी और फिज़ा भी दूसरी अब कमी खलती है... उस दौर की, उन हवाओं की, उन फिज़ाओं की अब तो साँस की कमी खलती है जी तो रहे हैं पर जीने की कमी खलती है नज़र तो है पर देखने की कमी खलती है मकान में घर की कमी खलती है समंदर में पानी की कमी खलती है रंग में ढूँढता रहता हूँ रंग संग में ढूँढता रहता हूँ साथ हाथों में हाथ हैं पर सदियों के बिछड़े हुये ज़िंदगी के रहते जीने की कमी खलती है वक़्त के रहते, वक़्त की कमी खलती है कमी खलती है मुझे... वक़्त की। Neelesh Misra’s work has reached some of the biggest audio platforms in India including All India Radio, Red FM, Big FM, Radio City, Radio Mirchi, RadioMantra and the Saavn App. This includes storytelling on themes from urban romance to rural role models to governance, by India’s leading and most loved storyteller Neelesh Misra, also the founder of the Gaon Connection rural media enterprise, a prolific lyricist, scriptwriter, author, singer, speaker, journalist and Mentor. Neelesh Misra is one of India's leading change-makers who has constantly introduced new and socially impactful ideas that have positively impacted millions of people. He has broken new ground with new and innovative ideas. Mr. Misra occupies a unique space among communications professionals and his work has had a diverse impact in India. His work straddles many worlds. Crusader of Conscious Entrepreneurship. Mr. Misra has led the creation of The Slow Movement brand and brought many spectrums of content, consumption, and connectivity together to audiences through a series of innovations that combine ground reach as well as digital reach. The Slow Movement is a sincere effort to go #BackToBasics — to a slower, more meaningful, and rooted life. As the founder of The Slow Movement, Mr. Misra is trying to help people reconnect with the beautiful small joys and experiences that we left behind in our fast-paced lives. These experiences could range from consuming relaxed video/audio/text content; sensory experiences and products and things that reflect the thinking, which is pure and uncorrupted. The Slow Movement is the umbrella concept which encompasses the following.

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